अम्बेडकरनगर।
अम्बेडकरनगर जिले से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हेमांशु विश्वकर्मा, जो बीते 41 दिनों से लापता हैं, उनका अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। इस मामले में पीड़ित परिवार की व्यथा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।
हेमांशु की मां और पिता बीते डेढ़ महीने से अपने बेटे की तलाश में लगातार भटक रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने दो बार मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या परिणाम सामने नहीं आया।
👩👦 मां की बिगड़ती तबीयत, छोटे भाई-बहन स्कूल नहीं जा पा रहे
पीड़ित परिवार का कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद से मां की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि वह ठीक से खाना-पीना भी नहीं कर पा रही हैं।
हेमांशु के छोटे भाई-बहन भी इस सदमे से जूझ रहे हैं, जिस कारण वे स्कूल तक नहीं जा पा रहे।
परिवार का आरोप है कि शिकायतें देने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन मिले हैं, न्याय नहीं।
🏛️ कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने खुलकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि—
- एक मां 41 दिनों से अपने बेटे के लिए परेशान है
- छोटे बच्चे धरने पर बैठने को मजबूर हैं
- बावजूद इसके प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी पूरी मजबूती से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आवाज उठाती रहेगी।
⚖️ कानून-व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
नेताओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
लापता युवक के मामले में अब तक कोई ठोस सफलता न मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
हालांकि प्रशासन की ओर से यह कहा गया है कि मामले की जांच जारी है और हर संभावित पहलू पर काम किया जा रहा है।
🗳️ आगामी पंचायत चुनाव और राजनीतिक संकेत
कांग्रेस नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी आगामी पंचायत चुनावों को पूरी ताकत के साथ लड़ेगी और ऐसे मामलों को जनता के सामने प्रमुखता से रखेगी।
नेताओं का कहना है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो न्याय और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
❓ अब भी बड़ा सवाल
- 41 दिनों बाद भी हेमांशु विश्वकर्मा का कोई सुराग क्यों नहीं?
- क्या पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल पाएगा?
- प्रशासन कब तक ठोस परिणाम सामने लाएगा?
इन सवालों के जवाब का इंतजार अब सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा इलाका कर रहा है।

