प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सीटों पर तैयारी तेज, लेकिन आरक्षण बना सबसे बड़ी चुनौती
अम्बेडकरनगर।
जिले में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए दावेदारों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही प्रत्याशी एक बड़े असमंजस में फंसे हुए हैं—आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इसी असमंजस के कारण कई संभावित प्रत्याशी अभी तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस सीट पर होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाए जाएं और कहां इंतजार किया जाए। दावेदारों को डर है कि यदि प्रचार पर खर्च कर दिया गया और बाद में वही सीट किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गई, तो सारा गणित बिगड़ सकता है।

📅 अप्रैल–मई में हो सकते हैं पंचायत चुनाव
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के हालिया संकेतों के बाद यह माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अप्रैल–मई 2026 में कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही आरक्षण प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
📊 आरक्षण किस आधार पर होगा?
जानकारों के अनुसार आरक्षण निर्धारण में दो बातें लगभग तय मानी जा रही हैं—
- 2011 की जनगणना को ही आधार बनाया जाएगा, क्योंकि इसके बाद नई जनगणना नहीं हुई है।
- साथ ही 2015 में लागू आरक्षण चक्र को संदर्भ माना जाएगा।
हालांकि, 2011 के बाद कई वार्डों और पंचायत क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन नई जनगणना न होने के कारण प्रशासन के पास 2011 के आंकड़ों के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
🔁 आरक्षण चक्र को ऐसे समझें
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक संभावित स्थिति कुछ इस प्रकार हो सकती है—
- यदि कोई सीट 2015 में OBC और 2021 में सामान्य रही हो, तो 2026 में वह सीट आरक्षित हो सकती है।
- यदि कोई सीट 2015 में सामान्य, 2021 में OBC रही हो, तो 2026 में वह अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है।
- यदि कोई सीट 2015 में आरक्षित, 2021 में सामान्य रही हो, तो 2026 में OBC के लिए आरक्षित होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त 33% महिला आरक्षण अलग से लागू होगा, जो अंतिम सूची में सीटों की स्थिति को और बदल सकता है।
🤔 दावेदारों की सबसे बड़ी दुविधा
इसी अनिश्चितता के कारण दावेदार यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि—
- कहां से चुनाव लड़ा जाए
- कहां प्रचार शुरू किया जाए
- और कहां अभी इंतजार किया जाए
कई दावेदारों का कहना है कि सीट आरक्षित हो जाने पर न केवल राजनीतिक तैयारी, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
🔍 आरक्षण तय होते ही बदलेगा सियासी माहौल
जानकारों का मानना है कि जैसे ही आरक्षण सूची जारी होगी, वैसे ही
ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सीटों पर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो जाएगी। तब तक जिले की राजनीति इंतजार और कयासों के दौर से गुजरती रहेगी।
