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Ambedkar Nagar News Himanshu: कड़कड़ाती ठंड में मां की ममता की हुई जीत,बेटा 50 दिन बाद सुरक्षित घर लौटा

Ambedkar Nagar News Himanshu

Ambedkar Nagar News Himanshu: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको भावुक कर दिया है। यह कहानी है सरफुद्दीनपुर गांव के रहने वाले 8वीं के छात्र हिमांशु की, जो पिछले 50 दिनों से लापता था। आज Ambedkar Nagar News Himanshu के बारे में चर्चा हर तरफ है क्योंकि यह सिर्फ एक बच्चे की घर वापसी नहीं है, बल्कि एक परिवार के अटूट विश्वास और सिस्टम से लंबी लड़ाई की जीत है।

Ambedkar Nagar News: कैसे शुरू हुआ यह दर्दनाक सिलसिला?

घटना 21 नवंबर की है, जब हिमांशु अपनी साइकिल लेकर बाजार के लिए निकला था। शाम ढल गई, रात बीत गई, लेकिन वह वापस नहीं आया। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। 11 दिसंबर को उसकी साइकिल अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिली। Ambedkar Nagar News Himanshu मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठने लगे।

परिजनों का आरोप है कि विवेचक आदर्श सिंह ने शुरू में भारी लापरवाही बरती। अगर पुलिस चाहती तो शुरुआती 10 दिनों के भीतर ही सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर बच्चे का सुराग लगा सकती थी। पुलिस की इसी सुस्ती ने एक मासूम के परिवार को 50 दिनों तक नरक जैसी पीड़ा झेलने पर मजबूर कर दिया।

कड़कती ठंड और कलक्ट्रेट पर ऐतिहासिक धरना

जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो परिवार का धैर्य जवाब दे गया। 29 दिसंबर को कड़कड़ाती ठंड और कोहरे के बीच पूरा परिवार धरने पर बैठ गया। माँ सुनीता विश्वकर्मा और पिता ने साफ कह दिया था कि “जब तक हिमांशु नहीं मिलेगा, हम घर की दहलीज पर कदम नहीं रखेंगे।” इस धरने की गूँज जब शासन-प्रशासन तक पहुँची, तब जाकर अंबेडकरनगर पुलिस हरकत में आई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कई टीमें गठित की गईं। पुलिसकर्मियों ने दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों के दूर-दराज इलाकों में डेरा डाला। Ambedkar Nagar News Himanshu को खोजने के लिए पुलिस ने युद्धस्तर पर प्रयास शुरू किए।

हिमांशु की घर वापसी: मां की ममता की हुई जीत

कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने हिमांशु को सकुशल बरामद कर लिया। जब वह गांव पहुँचा, तो पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। उसकी माँ सुनीता ने रोते हुए कहा, “इन 50 दिनों में हमने पल-पल मरना सीखा था। लेकिन आज मेरा बेटा मेरे सामने है, तो मेरा हर दर्द और हर तकलीफ खत्म हो गई है।” हिमांशु ने भी घर लौटकर राहत की सांस ली। पुलिस टीम, विशेषकर अलापुर थाने की टीम और उन सभी समर्थकों का परिवार ने आभार जताया है, जो इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहे। यह घटना हमें सिखाती है कि अगर हम अपनी मांग पर अड़े रहें, तो न्याय ज़रूर मिलता है

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