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अंबेडकरनगर: बसखारी बाइपास पर अंधेरा और अलाव की कमी, कड़ाके की ठंड में यात्री बेहाल

Darkness and lack of bonfires on the Baskhari bypass.

अंबेडकरनगर जिले के बसखारी बाइपास पर यात्रियों को रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अकबरपुर–बसखारी मार्ग का यह हिस्सा जिले का एक अहम ट्रांजिट प्वाइंट माना जाता है, जहां से लखनऊ, दिल्ली, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, वाराणसी समेत पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए रोडवेज और निजी बसें गुजरती हैं। इसके बावजूद यहां प्रकाश और अलाव जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव देखने को मिल रहा है।

ठंड और अंधेरे में मजबूर यात्री

कड़कड़ाती ठंड के इस मौसम में शाम ढलते ही बसखारी बाइपास पर अंधेरा पसर जाता है। सैकड़ों की संख्या में यात्री सड़क किनारे खड़े होकर या बैठकर बसों का इंतजार करते नजर आते हैं। लेकिन यहां न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही अलाव का कोई इंतजाम। ठंड से बचने के लिए लोग अपने-अपने तरीके से कपड़ों में लिपटकर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

स्थानीय यात्रियों का कहना है कि बसों का समय तय नहीं होता। कई बार देर रात तक इंतजार करना पड़ता है, ऐसे में अंधेरे के कारण दुर्घटना और असुरक्षा का खतरा भी बना रहता है।

दूर-दराज के यात्रियों को ज्यादा परेशानी

बसखारी बाइपास पर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्री भी बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। लखनऊ और दिल्ली की ओर जाने वाली बसें यहीं से होकर गुजरती हैं। वहीं पूर्वांचल के जिलों की ओर जाने वाली सवारियां भी इसी बाइपास पर उतरती और चढ़ती हैं। अंधेरे में बस से उतरना, सामान संभालना और आगे की यात्रा तय करना यात्रियों के लिए जोखिम भरा हो जाता है।

नगर पंचायत और प्रशासन पर उठ रहे सवाल

यह इलाका नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन इसके बावजूद यहां शीतकालीन अलाव योजना और प्रकाश व्यवस्था का लाभ नहीं पहुंच पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के अन्य हिस्सों में अलाव जलते नजर आते हैं, लेकिन बसखारी बाइपास जैसे महत्वपूर्ण स्थान को नजरअंदाज कर दिया गया है।

लोगों का मानना है कि यदि यहां दो बुनियादी व्यवस्थाएं — स्ट्रीट लाइट और अलाव — कर दी जाएं, तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

महिलाओं और बुजुर्गों के लिए ज्यादा दिक्कत

अंधेरा और ठंड सबसे ज्यादा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। देर रात बस का इंतजार करना असुरक्षित महसूस होता है। कई बार लोग मजबूरी में सड़क किनारे बैठ जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि बसखारी बाइपास पर जल्द से जल्द प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त की जाए और ठंड को देखते हुए अलाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी।

फिलहाल, यात्रियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाएगा, ताकि ठंड और अंधेरे में सफर करने वालों की परेशानियां कम हो सकें।

यह खबर मौके की स्थिति और स्थानीय यात्रियों की समस्याओं पर आधारित है।

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