अम्बेडकरनगर।टांडा डाकघर चोरी
“सावधान, आप CCTV कैमरे की नजर में हैं”— यह लाइन अक्सर लोगों को सुरक्षा का भरोसा देती है, लेकिन अम्बेडकरनगर जिले के टांडा डाकघर में यह चेतावनी सिर्फ बोर्ड तक ही सीमित रह गई। हकीकत में कैमरा खराब था और इसी लापरवाही का फायदा उठाकर उचक्कों ने एक महिला के ₹6000 चोरी कर लिए।
टांडा तहसील क्षेत्र के सुलेमपुर गांव की रहने वाली मस्लावती देवी डाकघर में अपने खाते में ₹6000 जमा करने पहुंची थीं। वह अन्य लोगों के साथ लाइन में खड़ी थीं। इसी दौरान किसी अज्ञात उचक्के ने उनके झोले को ब्लेड से काटकर उसमें रखे पूरे ₹6000 निकाल लिए।
जब काफी देर बाद नंबर आया और पैसे निकालने के लिए झोला देखा गया, तो उसमें रखी नकदी गायब थी। महिला के होश उड़ गए। वह रोने लगीं और आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी दी।
CCTV ने दिया धोखा
घटना के बाद मस्लावती देवी ने डाकघर कर्मचारियों से CCTV फुटेज दिखाने की मांग की, लेकिन जवाब चौंकाने वाला था। कर्मचारियों ने बताया कि डाकघर में लगा CCTV कैमरा काफी समय से खराब है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि डाकघर के बाहर और अंदर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है—
“सावधान, आप CCTV कैमरे की निगरानी में हैं”
लेकिन यह निगरानी केवल बोर्ड तक ही सीमित निकली।
पुलिस को दी गई सूचना
पीड़िता ने तत्काल मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। हालांकि CCTV खराब होने के कारण किसी संदिग्ध की पहचान नहीं हो सकी।
पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि घटना के समय कौन-कौन डाकघर परिसर में मौजूद था।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
- जब कैमरा खराब था तो उसे ठीक क्यों नहीं कराया गया?
- संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के नाम पर सिर्फ बोर्ड क्यों लगाए गए?
- क्या डाकघर जैसे सार्वजनिक संस्थानों में आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि डाकघर में रोज बुजुर्ग, महिलाएं और ग्रामीण बड़ी रकम लेकर आते हैं। ऐसे में CCTV का खराब होना सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है।
पीड़िता का दर्द
रोती हुई मस्लावती देवी ने कहा—
“हम पैसे जमा करने आए थे। लाइन में ही खड़े थे। कैमरा लगा था, लेकिन काम का नहीं। हमारा पैसा चला गया।”
घटना के समय मौजूद कुछ लोगों ने भी माना कि अगर कैमरा चालू होता, तो उचक्के की पहचान संभव थी।
क्या यह पहली घटना है?
स्थानीय लोगों के अनुसार टांडा क्षेत्र में इस तरह की उचक्कागिरी पहले भी हो चुकी है, लेकिन हर बार CCTV या निगरानी व्यवस्था फेल हो जाती है।
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