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अंबेडकरनगर में सियासी पारा हाई, राज्यसभा को लेकर अटकलें तेज

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2027 से पहले बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण

अम्बेडकरनगर।
जनपद में इन दिनों सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। मौसम में भले ही ठंड बढ़ी हो, लेकिन राजनीति का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। अंबेडकरनगर जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनमें वर्तमान समय में चार सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं, जबकि कटहरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है।

समाजवादी पार्टी के खाते में जलालपुर, अकबरपुर, टांडा और आलापुर विधानसभा सीटें शामिल हैं। वहीं आलापुर विधानसभा सीट आरक्षित है, जहां से समाजवादी पार्टी के त्रिभुवनदत्त विधायक हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अंबेडकरनगर जिले के एक कद्दावर नेता को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि नेता का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वर्ष 2026 में जिले से किसी बड़े चेहरे को राज्यसभा में भेजा जा सकता है। माना जा रहा है कि इसके पीछे जिले के जटिल राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति हो सकती है।

अंबेडकरनगर जिला लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक अधिकांश पदों पर बसपा का वर्चस्व रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती जहांगीरगंज विधानसभा क्षेत्र (वर्तमान में आलापुर) से विधायक रह चुकी हैं, वहीं अकबरपुर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुकी हैं। ऐसे में जिले की राजनीति अक्सर प्रदेश की राजनीति से अलग रुख दिखाती रही है।

राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2007 में बसपा सरकार के दौरान जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर बसपा का कब्जा रहा। वर्ष 2012 में परिस्थितियां बदलीं और सभी सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में चली गईं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में तीन सीटें बसपा को मिलीं, जबकि टांडा और आलापुर सीट भाजपा के खाते में गईं और समाजवादी पार्टी शून्य पर सिमट गई

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन अंबेडकरनगर की सभी पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल, सियासी जोड़-तोड़ और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

हालांकि मौजूदा हालात में समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए स्थिति अनुकूल मानी जा रही है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी को कमजोर आंकना राजनीतिक भूल साबित हो सकता है।

कांग्रेस पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है। वहीं 2027 से पहले होने वाले पंचायत चुनाव भी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। पंचायत चुनाव के नतीजे यह संकेत देंगे कि आगामी विधानसभा चुनाव में कौन सा दल किस मजबूती के साथ मैदान में उतरेगा और अंबेडकरनगर की सियासत किस करवट बैठेगी

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